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Shardiya Navratri 2025 Day 4: मां कुष्मांडा व्रत कथा, पूजा विधि, मंत्र और भोग

Chirag pic By - Thursday, Sep 25, 2025
Last Updated on Sep 25, 2025 11:35 AM

Image Source: Social Media

शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन देवी दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप को समर्पित होता है। मां कुष्मांडा को सृष्टि की आदि जननी माना गया है, जिनकी कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन मां की विशेष पूजा और व्रत कथा का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।

मां कुष्मांडा व्रत कथा (Navratri 2025 Day 4 Katha)

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब ब्रह्मांड का अस्तित्व शून्य और अंधकारमय था, उस समय त्रिदेव ने सृष्टि रचना का विचार किया। किंतु घोर अंधकार में यह संभव न था। ऐसे में आदिशक्ति दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा प्रकट हुईं।

कहा जाता है कि मां ने अपनी दिव्य मुस्कान से सम्पूर्ण ब्रह्मांड की रचना की। उनकी इस मुस्कान से ही चारों ओर प्रकाश फैल गया और ब्रह्मांड जीवंत हो उठा। इसी कारण उन्हें "कूष्मांडा" कहा गया—जिसका अर्थ है मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने वाली।

मां कुष्मांडा का निवास स्थान सूर्यलोक माना जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि उनके तेज से ही सूर्य मंडल आलोकित रहता है। यही कारण है कि मां की उपासना से साधक को ऊर्जा, बल और प्रकाश की प्राप्ति होती है।

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मां कुष्मांडा के मंत्र (Maa Kushmanda Puja Mantra)

  • मूल मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः ॥
  • बीज मंत्र: ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नमः ॥
  • स्तुति मंत्र:
    या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां कुष्मांडा की पूजा का महत्व

भक्तों का विश्वास है कि मां कुष्मांडा की आराधना से जीवन के सभी दुख, कष्ट और बाधाएँ दूर हो जाती हैं। उनकी कृपा से रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं और साधक को स्वास्थ्य, धन, समृद्धि तथा आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।

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मां कुष्मांडा को प्रिय भोग (Navratri 2025 Day 4 Bhog)

नवरात्रि के चौथे दिन मां को विशेष रूप से पीले रंग का पेठा (केसरयुक्त) अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त भक्त मालपुआ, बताशे और सफेद पेठा भी भोग स्वरूप चढ़ाते हैं। मान्यता है कि यह भोग अर्पित करने से मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर कृपा करती हैं।

मां कुष्मांडा की पूजा विधि (Shardiya Navratri 2025 Day 4 Puja Vidhi)

  • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल का छिड़काव करें और स्थान को पुष्पों से सजाएँ।
  • लकड़ी की चौकी पर पीले वस्त्र बिछाकर मां कुष्मांडा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • पूजा का संकल्प लेकर धूप, दीप, पुष्प, फल और मिठाइयाँ अर्पित करें।
  • मां को पीले वस्त्र और भोग अर्पित करें।
  • अंत में दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें और मां से क्षमा याचना करें।

निष्कर्ष

नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा से साधक को सुख, शांति, ऊर्जा और समृद्धि की प्राप्ति होती है। उनकी कृपा से जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है और हर बाधा दूर होकर सफलता के मार्ग खुलते हैं।

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Chirag Pandey Writter

Chirag Pandey

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