Eng vs Ind: तब सिराज अनगिनत बार फूट-फूटकर रोए, लेकिन कभी भी मैदान पर आधा-अधूरा प्रयास नहीं किया

Eng vs Ind 2nd Test: एक बड़े फैन वर्ग को अभी भी इस बात का मलाल है कि मोहम्मद सिराज (Mohammed Siraj) को लॉर्ड्स में मैन ऑफ द मैच क्यों नहीं चुना गया. और यह मलाल एकदम जाय है क्योंकि इस सीमर ने दोनों पारियों में मिलाकर 8 विकेट चटकाए.

Eng vs Ind: लॉर्ड्स में पिछले दिनों खत्म हुए टेस्ट में टीम विराट की जीत के बाद खिलाड़ियों और फैंस के बीच जश्न का माहौल है, लेकिन एक चर्चा अभी तक खत्म नहीं हो रही. और इसे समझा भी जा सकता है. चर्चा यह है कि बहुत बड़े वर्ग का यह मानना है कि लॉर्ड्स में मैन ऑफ द मैच मोहम्मद सिराज (Mohammed Siraj) को होना चाहिए था. वास्तव में, यह सिराज ही थे, जिन्होंने दोनों पारियों में मिलाकर आठ विकेट चटकाए और एक तरह से फिनिशिंग टच देने का काम किया, लेकिन जब मैच के बाद केएल राहुल (KL Rahul) को मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया, तो हर कोई एक बार को हैरान रह गया, लेकिन जीत की खुशी में भी सिराज के साथ सहानुभूति कम नहीं हुयी.

बहरहाल, सिराज की सफलता के पीछे की कहानी को हमेशा याद किया जाएगा और उनकी मिसाल दी जाएगा. इस युवा सीमर ने तमाम बाधाओं और मानसिक दबाव और भावनात्मक द्वंद्व को पीछे छोड़कर अपने पैर भारतीय टीम में जमा लिए हैं. थोड़े ही समय में सिराज ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में उन्हें मिली सफलता कोई तुक्का नहीं थी और उनके भीतर विकेट चटकाने की काबिलियत है.

यह तो सभी के सामने है कि पिछले साल 20 नवंबर को सिराज के पिता मोहम्मद गौस का निधन ऐसे समय हुआ, जब भारतीय खिलाड़ी 14 दिन के अनिवार्य क्वारंटीन काल में थे. सिराज को भारतीय मैनेजमेंट ने घर लौटने का विकल्प दिया था, लेकिन इस सीमर ने कर्मपथ का मार्ग चुना और आज तस्वीर सभी के सामने है. तब ऑस्ट्रेलिया दौरे में हालात ऐसे थे कि बाकी भारतीय खिलाड़ी भी उनसे नहीं मिल सके क्योंकि कोविड के प्रोटोकॉल बहुत ही सख्त थे और हर खिलाड़ी के कमरे के बाहर पुलिस तैनात रहती थी कि कहीं कोई खिलाड़ी प्रोटोकॉल तो नहीं तोड़ रहा.

ऐसे आड़े समय सिराज को पूरा दिन अकेले होटल के कमरे में अकेले गुजारना पड़ा. अलग-अलग भावों से द्वंद्व करना पड़ा, लेकिन टीम के साथी खिलाड़ी वीडियोकॉल के जरिए पूरे दिन सिराज से जुड़े रहे. यह एक ऐसा समय था जब कोई भी खिलाड़ी उनके कमरे में जाकर सिराज के कंधे पर हाथ रखकर या उन्हें गले लगाकर सांत्वना तक नहीं दे सकता था. खिलाड़ियों की हालत मानो कैदी जैसी हो गयी थी क्योंकि उनके कमरों के बाहर पुलिस तैनात थी. ऐसे में सभी खिलाड़ी पूरे दिन वीडियोकॉल के जरिए सिराज से जुड़े जिससे यह युवा कोई गलत कदम न उठा ले या खुद को किसी तरह का नुकसान न पहुंचा ले. वैसे इस दौरान केवल फिजियो नितिन पटेल को ही खिलाड़ियों के कमरे में जाने की इजाजत थी. पिता की घटना के बाद सिराज अनगिनत बार फूट-फूटकर रोए, लेकिन उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ देने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी.


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