By Uday
July 10, 2025
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10 जुलाई को गुरु पूर्णिमा है. यह दिन उन तमाम गुरुओं को समर्पित है, जो निस्वार्थ भाव से अपने शिष्यों को अज्ञानता के अंधेरे से ज्ञान के प्रकाश तक लेकर गए हैं.
आइए इसी कड़ी में आज आपको हिंदू ग्रंथों के सबसे महान और शक्तिशाली गुरुओं के बारे में बताते हैं.
द्रोणाचार्य कौरवों के गुरु और सेनापति थे. जो कि एक महान योद्धा थे. गुरु द्रोणाचार्य ने पांडवों, कौरवों और एकलव्य जैसे कई शूरवीरों को अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा दी थी.
परशुराम विष्णु भगवान के छठे अवतार माने जाते हैं. जिनका जन्म त्रेता युग में हुआ था. उन्होंने पिता महर्षि जमदग्नि से ही आरंभिक ज्ञान लिया. और फिर महादेव से भी युद्ध कला सीखी.
परशुराम अपने क्रोध और शस्त्र विद्या के लिए खूब जाने जाते थे. महाभारत काल में परशुराम ने गुरु द्रोणाचार्य, सूर्य पुत्र कर्ण और भीष्म पितामह जैसे सूरमाओं को अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा दी थी.
देव गुरु बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना जाता है. जिनका जन्म महर्षि अंगिरा के बेटे के रूप में हुआ था. बृहस्पति ने धर्म शास्त्र, नीति शास्त्र, अर्थशास्त्र और वास्तु शास्त्र पर ग्रंथ लिखे थे.
महापुराण के अनुसार, शुक्राचार्य को दानवों और राक्षसों और दैत्यों का गुरु माना जाता है. उन्हें संजीवनी का ज्ञान था. इसका ज्ञान स्वयं देवों के गुरु बृहस्पति को भी नहीं था.
महर्षि विश्वामित्र ने बरसों तक घोर तपस्या से ब्रह्म ऋषि की उपाधि हासिल की थी. महर्षि विश्वामित्र ने ही प्रभु राम-लक्ष्मण को ज्ञान दिया था.
गुरु पूर्णिमा का पर्व वेद व्यास को ही समर्पित है. महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना करने वाले वेद व्यास को गुरुओं का गुरु कहते हैं और वो हिंदू पुराणों का सबसे शक्तिशाली गुरु माना जाता है.
महर्षि वशिष्ठ की प्रेरणा से ही भागीरथ मां गंगा को धरती पर ला पाए थे. अपने योग बल से उन्होंने विश्वामित्र को पराजित किया था. महर्षि वशिष्ठ को सप्तऋषियों में से एक माना जाता है.